🌙 रमज़ान 2026: सऊदी अरब में चांद दिखा — भारत में कल से रोजा शुरू होने की तैयारी
इस्लामिक कैलेंडर का पवित्र महीना रमज़ान 2026 (Ramadan/Ramzan) इस बार फिर मुसलमानों के लिए इबादत, संयम और आत्म-निरीक्षण का खास दौर लेकर आया है। जैसा कि हर साल होता है, रमज़ान की शुरुआत चाँद के अवलोकन (moon sighting) पर निर्भर करती है और इस बार भी यही परंपरा अपनाई जा रही है।
सबसे पहले सऊदी अरब सहित यूएई और अन्य खाड़ी देशों में 17 फरवरी की शाम को शाबान के महीने का अर्धचंद्र (Hilal) दिखाई गया। उसके बाद इन देशों में 18 फरवरी से रमज़ान का पाक महीना शुरू हो गया है और वहां के मुसलमान पहला रोजा (fast) रख रहे हैं।
भारत में भी आज यानी 18 फरवरी की शाम को चाँद देखने की कोशिश पूरी श्रद्धा और इंतज़ार के साथ की जा रही है। खगोल शास्त्रियों और इस्लामिक समितियों के अनुसार यदि चांद आज शाम दिखाई देता है, तो भारत में पहला रोजा 19 फरवरी 2026 (गुरुवार) से रखा जाएगा।
📅 रमज़ान की शुरुआत और चाँद देखने की परंपरा
इस्लामी कैलेंडर चंद्र कैलेंडर (lunar calendar) पर आधारित है, जहाँ महीने की शुरुआत नई अर्धचंद्र चांद (Hilal) के देखने पर होती है। रमज़ान चौथे महीने का महीना नहीं बल्कि नौवां महीना है, जिसे मुसलमान इबादत, रोजा और दान-ख़ैरात के महीने के रूप में मानते हैं।
इस्लामिक मान्यता के अनुसार, पहला रोजा तभी रखा जाता है जब शाम के बाद चाँद का पहला अर्धचंद्र स्पष्ट दिखाई दे। कहीं-कहीं यह चाँद अलग-अलग स्थानों पर अलग तारीख को दिखता है, इसलिए देश और क्षेत्र के हिसाब से रोजा आरंभ करने की तारीख में थोड़ा अंतर हो सकता है।
भारत में भी आज शाम को पश्चिमी क्षितिज की ओर नजर रखी जा रही है, ताकि चाँद अगर दिखाई दे, तब रमज़ान की शुरुआत निश्चित की जा सके। इसका आधिकारिक ऐलान अक्सर Shahi Imam या Hilal Committee के माध्यम से होता है।
🕌 पहला रोजा और रोजे के नियम
अगर आज शाम चाँद दिखाई देता है, तो भारत में 19 फरवरी 2026 से पहला रोजा रखा जाएगा। रमज़ान के दौरान रोजा सुबह से सूर्यास्त तक रखा जाता है, यानी सूर्योदय के पहले सहरी (pre-dawn meal) और सूर्यास्त के बाद इफ्तार (fast breaking) में रोजा खोला जाता है।
रमज़ान का उद्देश्य सिर्फ भोजन और पानी का त्याग करना नहीं होता, बल्कि यह एक आध्यात्मिक सफ़र है, जिसमें इंसान संयम, सदाचार, दया, परोपकार और खुदा की इबादत में समय बिताता है। यह महीना आत्म-उन्नति, दूसरों के दुःख-तकलीफ़ समझने, और गरीबों की मदद के लिए भी माना जाता है।
🕐 सहरी और इफ्तार के समय (Indian cities)
रमज़ान में रोजा रखने वाले लोग प्रतिदिन सहरी और इफ्तार का समय स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार देखते हैं। जैसे:
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सहरी आम तौर पर सुबह सूर्योदय से पहले होती है
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इफ्तार सूर्यास्त के तुरंत बाद होता है
हर शहर में ये समय थोड़े-थोड़े मिनट अलग होता है, लेकिन मुख्य रूप से रोजा की अवधि लगभग 12-13 घंटे की होती है जब खाना-पानी से परहेज़ किया जाता है।
🕌 पवित्र रमज़ान का महत्व
रमज़ान मुसलमानों के लिए साल में एक ऐसा महीना है, जब वे रोजा रखते हुए अपने कर्मों और दिल की नज़ाकत पर ध्यान देते हैं। इस दौरान कुरान की आयतों का अधिकतम अध्ययन, नमाज़, दया और ज़कात जैसी सामाजिक सेवाओं का ज़ोर रहता है। इस्लाम के इतिहास में बताया गया है कि इसी महीने में कुरान के पहले शब्द फैलामुज़िल हुए थे और इसीलिए यह महीना रहमत और हिदायत से भरा माना जाता है।
📌 संक्षेप में
✔️ सऊदी अरब और खाड़ी देशों में 18 फरवरी से रमज़ान शुरू हो चुका है।
✔️ भारत में 18 फरवरी की शाम चाँद देखे जाने पर 19 फरवरी से रोजा शुरू होगा।
✔️ रोजा रोज सुबह से शाम तक रखा जाता है और उसके लिए सहरी-इफ्तार का समय हर दिन बदलता है।
✔️ रमज़ान का महीना इबादत, दान-ख़ैरात और आत्म-निरीक्षण का महीना है।
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