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कैलिफोर्निया के खेतों में गर्मी से जूझते किसान मजदूरों की सुरक्षा के लिए वैज्ञानिकों की नई पहल |

कैलिफोर्निया के खेतों में तपती गर्मी और मजदूरों की जंग

कैलिफोर्निया के इंपीरियल वैली (Imperial Valley) के खेतों में सुबह के चार बजते ही हलचल शुरू हो जाती है। आसमान अभी भी काला होता है जब राउल क्रूज़ (Raul Cruz) अपने साथियों के साथ गन्ने के खेत में पहुँचते हैं।
वह गन्ने को काटते, साफ करते और बंडल में बांधते हैं। सूरज निकलने से पहले जितना हो सके काम निपटा लेना ज़रूरी होता है क्योंकि इस रेगिस्तानी इलाके में तापमान अक्सर 100 डिग्री फ़ारेनहाइट (38°C से ज्यादा) तक पहुँच जाता है।

राउल कहते हैं —

“हम सुबह-सुबह इसलिए शुरू करते हैं ताकि गर्मी से बच सकें। जब तापमान बढ़ने लगता है, तो शरीर और दिमाग दोनों थक जाते हैं।”

वे बताते हैं कि उनका दल सुबह 9 या 10 बजे तक काम खत्म कर लेता है, वरना हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

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🌡️ गर्मी और जलवायु परिवर्तन का बढ़ता खतरा

कैलिफोर्निया का यह इलाका खेती के लिए मशहूर है, लेकिन यही गर्म और सूखा मौसम अब किसानों और मजदूरों के लिए खतरा बन गया है।
यह क्षेत्र ग्रीनहाउस गैसों (Greenhouse Gases) — जैसे कोयला, तेल और गैस के जलने से उत्पन्न प्रदूषण — के कारण और अधिक गर्म हो रहा है।

सैन डिएगो स्टेट यूनिवर्सिटी (SDSU) के शोधकर्ता निकोलेस लोपेज़-गाल्वेज़ (Nicolas Lopez-Galvez) और उनकी टीम इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि

लोपेज़-गाल्वेज़ कहते हैं —

“अगर अभी कदम नहीं उठाए गए, तो मजदूरों की जान पर बन सकती है। हमें समय रहते एक्शन लेना होगा।”


🧭 रूरल हीट मैपिंग: खेतों में गर्मी का विज्ञान

बीसवीं सदी की शुरुआत से अब तक कैलिफोर्निया का तापमान करीब 3°F (1.7°C) बढ़ चुका है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि दक्षिणी कैलिफोर्निया (Southern California) उत्तरी हिस्से से लगभग दो गुना तेजी से गर्म हो रहा है

इसी कारण, शोधकर्ता अब खेतों में गर्मी के स्तर को मापने और उसका वैज्ञानिक मानचित्र (Heat Map) तैयार करने में जुटे हैं।
वे सैटेलाइट इमेजरी, वेट बल्ब ग्लोब टेम्परेचर (Wet-Bulb Globe Temperature) और बॉडी सेंसर की मदद से मजदूरों के शरीर का तापमान, दिल की धड़कन और वातावरण की आर्द्रता का डेटा इकट्ठा कर रहे हैं।


🧑‍🌾 खेतों में काम और तापमान का रिश्ता

अब तक के शोध से पता चला है कि जो मजदूर भूमि-स्तरीय फसलों (ground-level crops) — जैसे गन्ना या सब्ज़ियाँ — पर काम करते हैं, उन्हें अधिक गर्मी झेलनी पड़ती है।
जबकि पेड़ या बेल वाली फसलों (tree crops) में काम करने वालों को कुछ राहत मिलती है।

मौसम, फसल का प्रकार और काम के घंटे — ये तीनों बातें तय करती हैं कि किसी मजदूर को हीट स्ट्रेस (Heat Stress) कितना झेलना पड़ेगा।
गर्मी के मौसम में जो मजदूर खेत तैयार करते हैं या सिंचाई प्रणाली की देखरेख करते हैं, वे सबसे अधिक खतरे में रहते हैं।


🌴 गांवों में गर्मी का असमान असर

रूरल इलाकों में तापमान हर जगह एक जैसा नहीं होता।
जिन क्षेत्रों में पेड़ों की छाया, नदियाँ या झीलें हैं, वहाँ थोड़ी ठंडक रहती है।
लेकिन खाली खेत या बिना पेड़ों वाले इलाके हीट आइलैंड (Heat Island) बन जाते हैं, जहाँ तापमान आस-पास के इलाकों से कई डिग्री ज्यादा होता है।

लोपेज़-गाल्वेज़ बताते हैं —

“ऐसे स्थानों पर लोग और मजदूर लगातार गर्मी के संपर्क में रहते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है।”


🚜 इंपीरियल वैली: खेती की ताकत, लेकिन बढ़ता संकट

इंपीरियल वैली कोलोराडो नदी (Colorado River) के पूर्व, साल्टन सी (Salton Sea) के उत्तर-पश्चिम और मैक्सिको की सीमा से सटा क्षेत्र है।
यहां लाखों एकड़ में खेती होती है और अरबों डॉलर की कृषि उपज हर साल पैदा होती है।
यह क्षेत्र अमेरिका में सर्दियों के दो-तिहाई सब्जियों की आपूर्ति करता है।

सिर्फ 2023 से 2024 के बीच, यहां 17,500 से ज्यादा प्रवासी और मौसमी मजदूर काम पर लगे हुए थे।
लेकिन बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण उनका जीवन और अधिक कठिन होता जा रहा है।

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🌎 निष्कर्ष: विज्ञान और संवेदना का संगम

कैलिफोर्निया के खेत सिर्फ भोजन नहीं देते, वे हजारों परिवारों की जीविका का आधार हैं।
लेकिन अगर गर्मी ऐसे ही बढ़ती रही, तो यह मेहनतकश वर्ग जलवायु परिवर्तन की पहली बलि बन सकता है।

शोधकर्ताओं की यह पहल न केवल वैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानवता और करुणा की भी मिसाल है।
यह हमें याद दिलाती है कि जलवायु न्याय (Climate Justice) का अर्थ है — उन लोगों की सुरक्षा जो हमारे भोजन की जड़ें तैयार करते हैं।

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