मुंबई: इंडसइंड बैंक ने अपने माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो में सामने आई ₹600 करोड़ की गड़बड़ी की गहराई से जांच के लिए EY (Ernst & Young) को एक और फॉरेंसिक ऑडिट करने का जिम्मा सौंपा है। यह मामला उस समय उजागर हुआ जब पिछले वित्तीय वर्ष की स्टैचुटरी ऑडिट के दौरान इस अंतर की जानकारी सामने आई।
क्या है मामला?
बैंक के ऑडिटर्स ने वित्त वर्ष 2023-24 की ऑडिट प्रक्रिया के दौरान पाया कि माइक्रोफाइनेंस से जुड़े ब्याज आय के आंकड़ों में ₹600 करोड़ का अंतर है। यह देखते हुए, कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 143(12) के तहत विशेष रिपोर्ट सौंपी गई और बैंक को सलाह दी गई कि वह इस मामले में विस्तृत फॉरेंसिक जांच करवाए।
अब यह काम EY को सौंपा गया है, जो भारत की सबसे बड़ी फॉरेंसिक ऑडिट फर्मों में से एक मानी जाती है।
पहले से चल रही एक और जांच
गौरतलब है कि इससे पहले Grant Thornton Bharat (GTB) को इंडसइंड बैंक के फॉरेक्स डेरिवेटिव्स पोर्टफोलियो में गड़बड़ियों की जांच के लिए नियुक्त किया गया था। लेकिन समय की कमी के चलते बैंक ने EY को अलग से इस नई जांच के लिए जिम्मेदारी दी है।
बैंक से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि यह समस्या वित्त वर्ष 2023-24 के दूसरे और तीसरे क्वार्टर में सामने आई है। EY की जांच से यह साफ होगा कि कहीं कोई धोखाधड़ी तो नहीं हुई।
डेरिवेटिव्स पोर्टफोलियो में भी बड़ा घाटा
इंडसइंड बैंक ने 15 अप्रैल को स्टॉक एक्सचेंज को सूचित किया था कि PwC (PricewaterhouseCoopers) द्वारा की गई एक अकाउंटिंग समीक्षा में बैंक को संभावित ₹1,979 करोड़ के घाटे की आशंका जताई गई है, जो कि पहले अनुमानित ₹1,600 करोड़ से कहीं अधिक है।
हालांकि PwC की रिपोर्ट में कई डिस्क्लेमर्स भी दिए गए थे। बैंक ने जून 2024 तक के प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट के आधार पर इस असर को 2.27% (पोस्ट टैक्स आधार पर) बताया था, जो दिसंबर 2024 तक की नेटवर्थ पर आधारित है।

EY पहले भी जुड़ा रहा है बैंक से
EY की सहयोगी फर्म SR Batliboi & Co. पहले (2018-2019) में बैंक की ऑडिटर रह चुकी है और EY की कंसल्टिंग टीम ने मार्च 2024 में बैंक के डेरिवेटिव्स पोर्टफोलियो की समीक्षा में भी मदद की थी।
निष्कर्ष:
इंडसइंड बैंक की ये लगातार सामने आ रही गड़बड़ियाँ निवेशकों और ग्राहकों दोनों के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। अब देखना होगा कि EY की रिपोर्ट क्या संकेत देती है – क्या यह सिर्फ अकाउंटिंग की गलती थी या इसके पीछे कोई गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी छिपी है?
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