कभी एक पारंपरिक तेल और गैस कंपनी रही रिलायंस इंडस्ट्रीज आज भारत की सबसे बड़ी कंज्यूमर कंपनियों में से एक बन चुकी है। मुकेश अंबानी के नेतृत्व में रिलायंस ने बीते दो दशकों में ऊर्जा सेक्टर से आगे बढ़कर रिटेल, टेलीकॉम और FMCG जैसे क्षेत्रों में कदम रखा और अब कंपनी की ग्रोथ इन्हीं कंज्यूमर बिजनेस यूनिट्स से हो रही है।
रिलायंस का नया मिशन: हायर इंडिया में 51% हिस्सेदारी की दौड़
रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड (RRVL) अब चीनी इलेक्ट्रॉनिक्स और होम अप्लायंसेज कंपनी हायर (Haier) के भारत संचालन में 51% हिस्सेदारी खरीदने की योजना बना रही है। इस रेस में अन्य दिग्गज भी हैं जैसे भारती ग्रुप के सुनील मित्तल, डाबर के बर्मन परिवार, अमित जटिया परिवार (गोल्डमैन सैक्स के साथ), और BK गोयंका (GIC सिंगापुर के साथ)।
ऊर्जा से कंज्यूमर बिजनेस तक: रिलायंस की ग्रोथ जर्नी
एक समय था जब रिलायंस की कमाई का बड़ा हिस्सा पेट्रोकेमिकल्स और ऑयल एंड गैस से आता था। लेकिन पिछले 5 वर्षों में कंपनी ने अरबों डॉलर निवेश किए, कई अधिग्रहण किए, हज़ारों नए स्टोर्स खोले और इंटरनेशनल ब्रांड्स से साझेदारी की। नतीजा—अब Jio और रिलायंस रिटेल जैसे कंज्यूमर बिज़नेस कंपनी की कमाई का मुख्य जरिया बन चुके हैं।
FY25 में रिलायंस का कुल EBITDA ₹1,748 अरब रहा, जिसमें से 56% यानी ₹986 अरब Jio, रिटेल और डिजिटल बिजनेस से आया। जबकि O2C (Oil-to-Chemicals) और एनर्जी यूनिट्स का योगदान सिर्फ 44% रहा। FY22 में यह आंकड़ा उल्टा था।
मुकेश अंबानी की रणनीति का कमाल
2020 में AGM के दौरान मुकेश अंबानी ने कहा था कि उनका लक्ष्य रिलायंस को एक टेक और कंज्यूमर कंपनी बनाना है। इसी दिशा में कंपनी ने UAE की ADIA, म्यूबाडाला और सऊदी अरब के PIF जैसे निवेशकों से भारी निवेश जुटाया। Bloomberg के अनुसार 2020 से 2023 के बीच करीब $8.24 बिलियन का निवेश रिलायंस रिटेल वेंचर्स में हुआ।
क्यों RRVL को Haier चाहिए?
रिलायंस डिजिटल, जियोमार्ट डिजिटल, और MyJio स्टोर्स पहले से ही कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में हैं। Haier भारत में तीसरी सबसे बड़ी कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी है, जो $1 बिलियन से अधिक का वार्षिक रेवेन्यू कमाती है। अगर RRVL इसका अधिग्रहण करती है, तो यह रिलायंस की ताकत को और बढ़ाएगा।
कैसे रिटेल बना रिलायंस का सबसे तेज़ी से बढ़ता सेक्टर
FY25 तक रिलायंस रिटेल के पास 19,340 स्टोर हैं जो 349 मिलियन कस्टमर्स को सर्व कर रहे हैं। रिलायंस ने Hamleys, Netmeds, Urban Ladder, Zivame, JustDial, Milkbasket, Clovia, Metro Cash & Carry और कई ब्रांड्स का अधिग्रहण किया।
2022 में रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (RCPL) की शुरुआत हुई, जिसने Campa Cola और Lotus Chocolate जैसी विरासत ब्रांड्स को खरीदा और Independence जैसे इन-हाउस ब्रांड्स लॉन्च किए।
आज RCPL भारत की सबसे तेज़ी से बढ़ती FMCG कंपनी बन गई है, जिसकी मौजूदगी 10 लाख से ज्यादा रिटेल आउटलेट्स में है।
थोड़ी सुस्ती, फिर रफ्तार
FY24 और FY25 की शुरुआत में रिलायंस रिटेल को कुछ झटके लगे। खर्च घटाए गए, कुछ स्टोर्स बंद हुए, और AJIO पर मार्केटिंग खर्च कम किया गया। Bloomberg के अनुसार, FY24 में करीब 38,000 कर्मचारियों की छंटनी हुई।
लेकिन FY25 के अंत तक ये कड़े कदम रंग लाए। स्टोर रेशनलाइजेशन और इन-हाउस ब्रांड्स पर फोकस से ग्रोथ में सुधार हुआ।
भविष्य की तस्वीर
रिटेल अभी भी रिलायंस का तीसरा सबसे बड़ा बिजनेस है लेकिन FY30 तक इसमें 10% CAGR की उम्मीद की जा रही है। FY27 तक इसका EBITDA 19% तक बढ़ने की संभावना है, जो इसे O2C बिजनेस से भी आगे कर सकता है।
तेल वाला बिजनेस अब दबाव में
O2C बिजनेस पर रूस-यूक्रेन युद्ध, ग्लोबल डिमांड में गिरावट और डीज़ल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी जैसे कारकों का असर पड़ा है। FY25 की Q4 में इसका EBITDA 10% गिरा।
निष्कर्ष
रिलायंस ने दिखा दिया है कि कैसे एक ऊर्जा-केंद्रित कंपनी भारत की सबसे बड़ी कंज्यूमर पॉवरहाउस में तब्दील हो सकती है। जहां एक तरफ पारंपरिक ऊर्जा बिजनेस दबाव में है, वहीं दूसरी तरफ रिलायंस रिटेल और डिजिटल बिजनेस भविष्य की ग्रोथ की नई धुरी बन चुके हैं।
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