दिल्ली: अपोलो अस्पताल से भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी को छुट्टी मिली
भाजपा के वरिष्ठ नेता और भारत रत्न से सम्मानित लाल कृष्ण आडवाणी को गुरुवार, 4 अप्रैल को रात भर अस्पताल में रहने के बाद अपोलो अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। उनकी हालत स्थिर बनी हुई है, जिससे उन्हें छुट्टी मिल गई।
अस्पताल में भर्ती होने का विवरण
भारतीय राजनीति के एक प्रमुख व्यक्ति लाल कृष्ण आडवाणी को बुधवार रात करीब 9 बजे अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया। न्यूरोलॉजी के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. विनीत सूरी की देखरेख में चिकित्सकीय निगरानी और देखभाल के बाद उनकी हालत स्थिर बनी हुई है। गुरुवार शाम 5 बजे तक उन्हें छुट्टी के लिए फिट माना गया।
पहले अस्पताल में भर्ती होना
गौरतलब है कि आडवाणी को 26 जून को भी इसी तरह की अस्पताल में भर्ती होने की घटना का सामना करना पड़ा था, जब उन्हें राष्ट्रीय राजधानी के एम्स में भर्ती कराया गया था और अगले दिन उनकी हालत स्थिर होने के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई थी।
लाल कृष्ण आडवाणी: भारतीय राजनीति के स्तंभ
लाल कृष्ण आडवाणी का राजनीतिक करियर करीब तीन दशक लंबा है, जिसने उन्हें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक बना दिया है। यहां उनके जीवन और करियर से जुड़ी कुछ मुख्य बातें दी गई हैं:
– प्रारंभिक जीवन और प्रेरणा: 8 नवंबर, 1927 को विभाजन-पूर्व सिंध में जन्मे आडवाणी के देशभक्ति के आदर्शों को कराची के सेंट पैट्रिक हाई स्कूल में उनकी स्कूली शिक्षा के दौरान आकार मिला। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन से प्रेरित होकर, वे 14 वर्ष की आयु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में शामिल हो गए।
– परिवार और शिक्षा: आडवाणी की शुरुआती आकांक्षाओं को उनके माता-पिता, किशनचंद आडवाणी और ज्ञानीदेवी और उनकी छोटी बहन शीला ने समर्थन दिया। अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने हैदराबाद के दयाराम गिदुमल नेशनल कॉलेज में उच्च शिक्षा प्राप्त की और कराची के मॉडल हाई स्कूल में शिक्षक के रूप में काम किया।
– राजनीतिक यात्रा: विभाजन के बाद, आडवाणी दिल्ली चले गए और राजस्थान में आरएसएस के प्रचारक बन गए। 1951 में, वे भाजपा के पूर्ववर्ती जनसंघ में शामिल हो गए और जल्दी ही रैंकों में ऊपर उठ गए। 1957 में वे अटल बिहारी वाजपेयी की सहायता के लिए दिल्ली चले गए और 1970 में राज्यसभा सदस्य बन गए। 1980 में भाजपा की स्थापना में आडवाणी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और 1990 के दशक में एक प्रमुख राजनीतिक ताकत के रूप में इसके उदय में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
– मुख्य राजनीतिक भूमिकाएँ: आडवाणी ने 1975 में जनता पार्टी सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्री, 1998 और 1999 में भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में केंद्रीय गृह मंत्री और 2002 में उप प्रधान मंत्री के रूप में कार्य किया। वे 1990 के दशक में राम जन्मभूमि आंदोलन में भी एक प्रमुख व्यक्ति थे।
सोशल मीडिया अपडेट
इन घटनाओं के बीच, सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म आडवाणी के शीघ्र स्वस्थ होने की अपडेट और शुभकामनाओं से भरे हुए थे।
निष्कर्ष
लाल कृष्ण आडवाणी की स्थिर हालत और उसके बाद अपोलो अस्पताल से छुट्टी उनके समर्थकों और शुभचिंतकों के लिए राहत की बात है। भारतीय राजनीति और भाजपा में उनका दीर्घकालिक योगदान देश भर में कई लोगों को प्रेरित करता रहता है।
