म्यूचुअल फंड आज निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। AMFI के अनुसार, पिछले 5 सालों में म्यूचुअल फंड का AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) 2.8 गुना बढ़ा है। इसकी बड़ी वजह है निवेश का आसान तरीका।
हालांकि, म्यूचुअल फंड का टैक्सेशन आज भी बहुत से निवेशकों को उलझन में डालता है। इस ब्लॉग में हम वित्तीय वर्ष 2024-25 (आकलन वर्ष 2025-26) के लिए म्यूचुअल फंड टैक्सेशन को सरल भाषा में समझाएंगे।
म्यूचुअल फंड का वर्गीकरण: टैक्सेशन के नजरिए से
31 मार्च 2025 तक भारत में 1,760 से ज्यादा म्यूचुअल फंड योजनाएं थीं। टैक्स नियमों के अनुसार, म्यूचुअल फंड्स को 3 श्रेणियों में बांटा गया है:
इक्विटी-ओरिएंटेड फंड्स: कम से कम 65% निवेश भारतीय सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में।
स्पेसिफाइड म्यूचुअल फंड्स: 35% या उससे कम निवेश भारतीय शेयरों में।
अन्य म्यूचुअल फंड्स: 35.01% से 64.99% निवेश भारतीय कंपनियों के शेयरों में।
स्पेसिफाइड फंड्स में आमतौर पर शामिल होते हैं:
लिक्विड फंड्स, मनी मार्केट फंड्स, इनकम फंड्स, गिल्ट फंड्स
गोल्ड ETFs, बॉन्ड ETFs
डोमेस्टिक फंड ऑफ फंड्स, ओवरसीज फंड ऑफ फंड्स
इंफ्रास्ट्रक्चर डेब्ट फंड्स आदि
अन्य फंड्स में मुख्य रूप से बैलेंस्ड हाइब्रिड फंड्स आते हैं, जो 40%-60% इक्विटी में निवेश बनाए रखते हैं।
होल्डिंग अवधि के अनुसार टैक्स दरें
म्यूचुअल फंड से होने वाले टैक्स का एक और महत्वपूर्ण पहलू है होल्डिंग पीरियड:
फंड का प्रकार शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG)
इक्विटी-ओरिएंटेड फंड्स 12 महीने तक 12 महीने से ज्यादा
स्पेसिफाइड फंड्स हमेशा STCG हमेशा STCG
अन्य फंड्स 24 महीने तक 24 महीने से ज्यादा
टैक्स दरें किस प्रकार लागू होती हैं?
फंड का प्रकार शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन
इक्विटी-ओरिएंटेड फंड्स 15% (23 जुलाई 2024 से पहले), फिर 20% 10% (23 जुलाई 2024 से पहले), फिर 12.5% ₹1.25 लाख से अधिक लाभ पर
स्पेसिफाइड फंड्स स्लैब रेट स्लैब रेट
अन्य फंड्स स्लैब रेट 20% इंडेक्सेशन के साथ (23 जुलाई 2024 से पहले), फिर 12.5%
नोट: अगर आपने डेब्ट फंड 1 अप्रैल 2023 से पहले खरीदा था, तो उस पर इंडेक्सेशन के बाद 20% टैक्स लागू होता था। अब 12.5% टैक्स लागू होगा।
FIFO मेथड का असर कैसे पड़ता है?
FIFO (First In, First Out) नियम के अनुसार जब आप म्यूचुअल फंड यूनिट्स बेचते हैं, तो सबसे पहले खरीदी गई यूनिट्स को सबसे पहले बेचा हुआ माना जाता है।
उदाहरण के लिए:
अगर आपने 1 जनवरी 2020 को 1000 यूनिट खरीदीं और 1 जून 2020 को 500 यूनिट और खरीदीं, और फिर 1 जनवरी 2021 को 800 यूनिट बेचीं, तो बेची गई यूनिट्स को 1 जनवरी 2020 की खरीद से माना जाएगा।
यह तरीका आपके कैपिटल गेन या लॉस के हिसाब को प्रभावित करता है।
गड़बड़ी से बचने के लिए CAS और AIS से मिलान करें
अपनी म्यूचुअल फंड लेनदेन की जानकारी को सही तरह से ट्रैक करने के लिए:
CAMS, KFintech, या अपनी ब्रोकरेज फर्म से कैपिटल गेन स्टेटमेंट डाउनलोड करें।
इसे इनकम टैक्स पोर्टल पर उपलब्ध AIS (Annual Information Statement) से मिलान करें।
इस मिलान से गलत रिपोर्टिंग और नोटिस आने से बचा जा सकता है।
कौन सा ITR फॉर्म भरना है?
अगर आपके पास केवल सैलरी, संपत्ति से आय और पूंजीगत लाभ हैं, तो आपको ITR-2 भरना चाहिए।
अगर आपके पास बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम भी है, तो आपको ITR-3 फॉर्म भरना होगा।
समय पर फाइल करना क्यों जरूरी है?
आयकर रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि: 31 जुलाई 2025 है।
समय पर फाइल करने से:
आप पूंजीगत हानियों को अगले 8 साल तक आगे बढ़ा सकते हैं।
सेक्शन 80 के तहत समय से फाइल न करने पर नुकसान को आगे सेटऑफ करने का लाभ नहीं मिलता।
समय पर सही फॉर्म भरकर आप भविष्य में टैक्स प्लानिंग को बेहतर बना सकते हैं!

