ऑपरेशन

7 मई की सुबह,

भारत ने आतंक के अड्डों पर एक ऐसा जवाबी वार किया जिसने न केवल पाकिस्तान बल्कि पूरे विश्व को यह संदेश दे दिया कि अब भारत चुप नहीं बैठेगा। इस सर्जिकल स्ट्राइक का नाम था “ऑपरेशन सिंदूर”, जो पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में किया गया।

लेकिन इस कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद, भारत के पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने सोशल मीडिया पर एक रहस्यमयी लेकिन शक्तिशाली संदेश पोस्ट किया:

“अभी पिक्चर बाकी है…”
इस एक पंक्ति ने देशवासियों को गर्व से भर दिया और दुश्मनों को यह समझा दिया कि यह तो बस शुरुआत है।

क्या था ऑपरेशन सिंदूर?
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत हो गई थी, जिनमें एक नेपाली नागरिक भी शामिल था। इसके जवाब में, भारत ने 7 मई को सुबह 1:05 बजे से 1:30 बजे तक एक सटीक और योजनाबद्ध हमला किया।

इस अभियान में भारत की थल सेना, वायु सेना और नौसेना ने संयुक्त रूप से 9 प्रमुख आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, जो पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित थे।

किन ठिकानों पर बरसी भारत की गाज़?
मर्कज़ सुब्हान अल्लाह (बहावलपुर) – जैश-ए-मोहम्मद का 15 एकड़ में फैला मुख्य ट्रेनिंग सेंटर

मर्कज़ तैबा (मुरीदके) – लश्कर-ए-तैयबा का 82 एकड़ का मुख्यालय, जहाँ हथियारों की ट्रेनिंग, मदरसा, और गेस्ट हाउस थे

सरजल कैंप (सियालकोट)

मार्कज़ अहले हदीस

बारनाला और कोटली के अब्बास कैंप

महमूना जोया कैंप (सियालकोट)

इन ठिकानों को न केवल भारत में आतंक फैलाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था, बल्कि यहीं 26/11 मुंबई हमलों के आरोपी जैसे अजमल कसाब और डेविड हेडली को भी प्रशिक्षित किया गया था।

ऑपरेशन की खासियत क्या थी?
➡️ कोई नागरिक हताहत नहीं हुआ
➡️ केवल आतंक के ढांचे को निशाना बनाया गया
➡️ पूरा ऑपरेशन नपा-तुला और गैर-उत्तेजक था
➡️ IAF ने पाकिस्तान के भीतर 4 स्थानों पर हमला किया, जबकि 5 PoK में किए गए

Wing Commander व्योमिका सिंह ने जानकारी दी कि ऑपरेशन का मकसद आतंक के खिलाफ न्याय करना और भविष्य के हमलों को रोकना था। साथ में विदेश सचिव विक्रम मिस्री और कर्नल सोफिया कुरैशी भी मौजूद थे, जिन्होंने ऑपरेशन के वीडियो सबूत और निशाने के नाम भी साझा किए।

जनरल नरवणे का संदेश: “Picture Abhi Baki Hai”
पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे के शब्द केवल एक वाक्य नहीं थे, बल्कि एक रणनीतिक चेतावनी भी थी। इसका सीधा अर्थ है कि भारत आतंक के खिलाफ लंबी लड़ाई के लिए तैयार है — यह ऑपरेशन अंत नहीं, शुरुआत है।

सरकार का स्पष्ट संदेश: “अब बर्दाश्त नहीं, जवाब होगा”
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि पहलगाम हमला जानबूझकर किया गया था ताकि कश्मीर में शांति को बाधित किया जा सके। उन्होंने कहा:

“भारत के पास कार्य करने का अधिकार और आवश्यकता दोनों थी। यह जवाब सटीक, संतुलित और भविष्य के खतरों को रोकने के लिए था।”

निष्कर्ष: अब बातों का नहीं, एक्शन का दौर है
ऑपरेशन सिंदूर ने दिखा दिया कि भारत अब सिर्फ निंदा नहीं करता, बल्कि जवाब देता है, और वह भी दुनिया को दिखाकर।
और जनरल नरवणे की तरह, हम सब यही कहेंगे —

“अभी पिक्चर बाकी है, मेरे दोस्त!”

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