पोप फ्रांसिस अब हमारे बीच नहीं रहे। 88 वर्ष की आयु में, उन्होंने वेटिकन सिटी स्थित Casa Santa Marta में अंतिम सांस ली। ईस्टर मंडे जैसे पवित्र दिन पर उनका जाना ईसाई समाज और पूरे विश्व के लिए एक भावनात्मक क्षण बन गया।

सुबह 7:35 बजे, कार्डिनल केविन फैरेल ने यह घोषणा करते हुए कहा,

“हमारे पवित्र पिता फ्रांसिस अब प्रभु के घर लौट गए हैं। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन प्रभु और चर्च की सेवा में समर्पित किया।”

पोप फ्रांसिस की पहचान केवल एक धार्मिक नेता के रूप में नहीं थी, बल्कि वे एक करुणामयी, सरल और गरीबों के हितैषी व्यक्ति थे। उन्होंने हमेशा वंचित वर्ग की आवाज़ बनने की कोशिश की और मानवता के मूल्यों को प्राथमिकता दी।

अंतिम विदाई की तैयारियाँ
पोप फ्रांसिस के पार्थिव शरीर को बुधवार, 23 अप्रैल 2025 को सेंट पीटर्स बेसिलिका में लाया जाएगा, ताकि श्रद्धालु उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दे सकें। इसी दिन कार्डिनल्स की बैठक में उनके अंतिम संस्कार की तारीख और प्रक्रिया पर निर्णय लिया जाएगा।

सोमवार शाम 8 बजे उनके निधन की औपचारिक पुष्टि और ताबूत में पार्थिव शरीर रखने की रस्म अदा की गई। उनके निजी आवास पर सील लगा दी गई है।

स्वास्थ्य और जीवन संघर्ष
पोप फ्रांसिस लंबे समय से श्वसन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। फरवरी 2025 में उन्हें ब्रोंकाइटिस की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में यह बीमारी बाइलेटरल निमोनिया में बदल गई। 38 दिनों के इलाज के बाद वे वेटिकन लौटे, लेकिन पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो सके।

ये उनका पहला संघर्ष नहीं था — 1957 में भी, अर्जेंटीना में उनके एक फेफड़े का हिस्सा हटा दिया गया था। उम्र बढ़ने के साथ यह तकलीफ और गहरी होती चली गई।

पोप फ्रांसिस

अंतिम इच्छा: एक सादा और आध्यात्मिक विदाई
2024 में उन्होंने स्वयं अपने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को सरल और आत्मिक रूप देने की अनुमति दी थी। उन्होंने कहा था कि,

“पोप का अंतिम संस्कार एक शासक का नहीं, बल्कि मसीह के सेवक और अनुयायी का होना चाहिए।”

उनकी अंतिम इच्छा थी कि उनका अंतिम विदाई समारोह केवल विश्वास, सेवा और प्रभु यीशु के पुनरुत्थान पर आधारित हो — बिना किसी भव्यता के।

निष्कर्ष
पोप फ्रांसिस का निधन न केवल कैथोलिक चर्च, बल्कि पूरे विश्व के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने प्रेम, सहानुभूति और समानता के साथ जीवन जीने का संदेश दिया। उनके जाने से एक युग का अंत हुआ है, लेकिन उनके विचार और शिक्षा सदा जीवित रहेंगे।

🙏 ईश्वर से प्रार्थना है कि वे पोप फ्रांसिस की आत्मा को शांति दें

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