भारतीय रुपया ने शुक्रवार सुबह की ट्रेडिंग में ज़बरदस्त मज़बूती दिखाई और 84 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया — जो अक्टूबर 2024 के बाद पहली बार हुआ है। यह उछाल विदेशी बैंकों की तरफ से भारी डॉलर बिक्री, क्षेत्रीय मुद्राओं की मजबूती और भारत में इक्विटी में निवेश बढ़ने के चलते आया है।
रुपया 83.83 तक पहुंचा, 2% की साप्ताहिक बढ़त
शुक्रवार को रुपया 0.7% की छलांग के साथ 83.83 प्रति डॉलर के उच्चतम स्तर तक पहुंचा, जबकि पिछली क्लोजिंग 84.4875 थी। इस हफ्ते की बात करें तो रुपया अब तक करीब 2% मजबूत हुआ है।
क्यों बढ़ रही है रुपये की ताकत?
ट्रेडर्स का कहना है कि हाल के दिनों में कुछ मुख्य कारणों ने रुपये को मज़बूत किया है:
भारतीय शेयर बाजारों में विदेशी निवेश (FIIs) में तेज़ी
अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत
रुपये के खिलाफ शॉर्ट सेलिंग पोजिशनों की लिक्विडेशन
लगातार 11वें दिन FII इनफ्लो
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार 11वें दिन भारतीय शेयरों में निवेश किया, जो पिछले दो वर्षों में सबसे लंबा निवेश का सिलसिला है। यह रुपये के लिए बहुत बड़ा सपोर्ट रहा है।
विश्लेषकों का नजरिया बदल रहा है
रुपये की लगातार बढ़त के चलते अब कई वित्तीय संस्थानों ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। MUFG ने एक रिपोर्ट में कहा:
“हम अब उम्मीद करते हैं कि भारतीय रुपया एशियाई मुद्राओं की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करेगा। अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और भारत के लिए व्यापार शुल्क (tariff) में संभावित राहत इसकी वजह हो सकती है।”
विदेशी बैंक और कस्टोडियल डॉलर सेल्स
एक सरकारी बैंक के ट्रेडर के मुताबिक, शुक्रवार को कई विदेशी बैंक डॉलर बेचते देखे गए, जो संभवतः उनके कस्टोडियल क्लाइंट्स की ओर से थे। वहीं, डॉलर खरीदने वाले कम नज़र आए, जिससे रुपया और मज़बूती के साथ 84 के नीचे फिसल गया।
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